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آج کی شاعری — Featured Shayari
तुमसे मिलना जैसे,
पहली बारिश का एहसास,
ना भूला जाए कभी,
ना बताया जाए किसी को।
तुम्हारी याद आती है रोज़ रात को,
आँखें बंद हों या खुली, बस तुम ही हो,
ये नींद भी अजीब है मेरी,
जागते हुए भी सपने दिखाती है।
दर्द को शब्दों में कहाँ कह सकता हूँ,
चुप रहकर भी तो दुखता है दिल,
जो समझे वो साथ है मेरे,
जो न समझे वो भीड़ में शामिल।
ज़िंदगी का यह सफ़र,
कभी-कभी बहुत थका देता है,
जब कोई साथ नहीं होता,
तब रास्ता और लंबा लगता है।
तुम्हारी याद आती है रोज़ रात को,
आँखें बंद हों या खुली, बस तुम ही हो,
ये नींद भी अजीब है मेरी,
जागते हुए भी सपने दिखाती है।
दर्द को शब्दों में कहाँ कह सकता हूँ,
चुप रहकर भी तो दुखता है दिल,
जो समझे वो साथ है मेरे,
जो न समझे वो भीड़ में शामिल।
प्यार की कोई परिभाषा नहीं,
बस एहसास होता है,
जब तेरी एक झलक मिलती है,
दिल कहाँ थम जाता है।
तेरी याद में रहता हूँ,
हर वक़्त, हर घड़ी,
बिन बुलाए आ जाती है,
तेरी सूरत मेरी आँखों में।
तेरी आवाज़ सुनकर,
सब कुछ भूल जाता है,
एक पल में ही मेरा,
सारा जहाँ बदल जाता है।
कल जो बीत गया, बीत गया,
आज जो है, वो तुम्हारा है,
कल जो आएगा, उसे बनाओ,
यही ज़िंदगी का सार है।
रुक जाना नहीं तुझे,
राहें कठिन हों तो भी,
सपनों का पीछा करना,
मंज़िल मिलेगी तो भी।
जीतने की चाह जब होती है,
तब हार भी हथियार बनती है,
नाकामी भी सिखाती है,
ज़िंदगी आगे बढ़ना जब।