Apni Roshni Khud Hoon
किसी की परछाईं बनकर नहीं जीती,
मैं अपनी रोशनी ख़ुद हूँ।
Kisi ki parchhai bankar nahi jeeti,
Main apni roshni khud hoon.
کسی کی پرچھائیں بن کر نہیں جیتی،
میں اپنی روشنی خود ہوں۔
The speaker refuses to live as someone's shadow; she is her own light. The couplet is about independence and not measuring your worth through another person.
मुस्कान मेरी सादगी है,
और ख़ामोशी मेरा ग़ुरूर।
जलने वालों की दुआ से ही,
मैं हर रोज़ और चमकती हूँ।
पापा की परी हूँ,
पर दुनिया के लिए शेरनी।
मुझे बदलने की कोशिश मत करो,
मैं मौसम नहीं, पहचान हूँ।
ठोकरें खाकर सँभलना सीखा है,
अब गिरने से डर नहीं लगता।
मेरे लफ़्ज़ों में मिठास है,
पर इरादों में फ़ौलाद।