Rani Hoon Apni Marzi Ki
रानी हूँ अपनी मर्ज़ी की,
ताज किसी से माँगा नहीं।
Rani hoon apni marzi ki,
Taaj kisi se maanga nahi.
رانی ہوں اپنی مرضی کی،
تاج کسی سے مانگا نہیں۔
A line about self-made confidence. The speaker calls herself a queen by her own choice – the crown was never begged from anyone. The point is dignity that does not depend on other people's permission.
मेरी ख़ामोशी को कमज़ोरी मत समझना,
मैं बोलती हूँ तो इतिहास बदल जाता है।
लड़की हूँ, लड़ना जानती हूँ,
हार कर भी जीतना जानती हूँ।
मेरे सपनों की उड़ान ऊँची है,
पिंजरे मेरी पहचान नहीं।
जो मेरी क़द्र नहीं करता,
उसके लिए मेरे पास वक़्त नहीं।
मैं आईना हूँ, सच दिखाती हूँ,
इसीलिए कुछ लोगों को चुभती हूँ।
नख़रे मेरे, मर्ज़ी मेरी,
ज़िंदगी मेरी, शर्तें भी मेरी।