Sapno Ki Oonchi Udaan
मेरे सपनों की उड़ान ऊँची है,
पिंजरे मेरी पहचान नहीं।
Mere sapnon ki udaan oonchi hai,
Pinjre meri pehchaan nahi.
میرے خوابوں کی اڑان اونچی ہے،
پنجرے میری پہچان نہیں۔
The speaker says her dreams fly high and cages do not define her. It rejects limits placed on her by others and treats freedom as part of her identity.
जो मेरी क़द्र नहीं करता,
उसके लिए मेरे पास वक़्त नहीं।
मैं आईना हूँ, सच दिखाती हूँ,
इसीलिए कुछ लोगों को चुभती हूँ।
नख़रे मेरे, मर्ज़ी मेरी,
ज़िंदगी मेरी, शर्तें भी मेरी।
किसी की परछाईं बनकर नहीं जीती,
मैं अपनी रोशनी ख़ुद हूँ।
मुस्कान मेरी सादगी है,
और ख़ामोशी मेरा ग़ुरूर।
जलने वालों की दुआ से ही,
मैं हर रोज़ और चमकती हूँ।