अनजाने दर्द को अब,
पहचानना सीख गया हूँ,
हर मुस्कुराहट के पीछे,
दर्द छुपाना सीख गया हूँ।
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अनजाने दर्द को अब,
पहचानना सीख गया हूँ,
हर मुस्कुराहट के पीछे,
दर्द छुपाना सीख गया हूँ।
ज़िंदगी का यह सफ़र,
कभी-कभी बहुत थका देता है,
जब कोई साथ नहीं होता,
तब रास्ता और लंबा लगता है।
सब कुछ भूल जाऊँ काश,
तेरी यादें भी भूल जाऊँ,
मगर दिल है कि मानता नहीं,
तुझे कैसे भूल जाऊँ।
रात के अँधेरे में,
दिल का दर्द बढ़ जाता है,
कोई साथ नहीं होता,
अकेलापन घेर लेता है।
वो बातें याद हैं अब भी,
जो कभी हम करते थे,
उन गलियों में जाने से डरता हूँ,
जहाँ हम कभी मिलते थे।
तुझसे कुछ नहीं माँगता अब,
बस इतनी दुआ है,
जो दर्द तूने दिया है,
उसका दवा मिल जाए।
चुपके से आता है ये दर्द,
चुपके से दिल को रुलाता है,
कोई नहीं होता पास में,
तब ये और तड़पाता है।
पुरानी मोहब्बत की यादें,
दिल के किसी कोने में बसी हैं,
मिटाना चाहता हूँ उन्हें,
मगर वो मिटती ही नहीं हैं।
आँखों की नमी छुपाता हूँ,
सबके सामने मुस्कुराता हूँ,
मगर अकेले में जब रोता हूँ,
तब अपना असली चेहरा पाता हूँ।