Aankhon Ki Nami
आँखों की नमी छुपाता हूँ,
सबके सामने मुस्कुराता हूँ,
मगर अकेले में जब रोता हूँ,
तब अपना असली चेहरा पाता हूँ।
Aankhon ki nami chhupaata hoon,
Sabke saamne muskuraata hoon,
Magar akele mein jab rota hoon,
Tab apna asli chehra paata hoon.
آنکھوں کی نمی چھپاتا ہوں، سب کے سامنے مسکراتا ہوں
The speaker hides wet eyes and smiles in front of everyone, but finds the true face only when crying alone.
रूह की बात जिस्म नहीं समझता,
दिल की बात ज़माना नहीं समझता,
यह दर्द मेरा अपना है,
इसे अब मैं ही समझता हूँ।
आँखों में समंदर है मेरा,
मगर कोई नहीं देखता,
हर आँसू एक कहानी है,
मगर कोई नहीं सुनता।
जुदाई का दर्द वो जाने,
जिसने मोहब्बत की हो,
बिछड़ने के बाद की रातें,
सिर्फ़ वही समझ सकता है।
ख़ुद से बातें करना सीख गया हूँ,
तनहाई में जीना सीख गया हूँ,
जब से तू गया है ज़िंदगी से,
दर्द को मुस्कुराहट में छुपाना सीख गया हूँ।
तुम्हारी याद आती है रोज़ रात को,
आँखें बंद हों या खुली, बस तुम ही हो,
ये नींद भी अजीब है मेरी,
जागते हुए भी सपने दिखाती है।
तेरी ख़ुशबू अब भी आती है,
उन यादों की पगडंडी पर,
जहाँ हम साथ चलते थे,
वहाँ अब सिर्फ़ मैं हूँ।