जुदाई का दर्द वो जाने,
जिसने मोहब्बत की हो,
बिछड़ने के बाद की रातें,
सिर्फ़ वही समझ सकता है।
Judaai ka dard woh jaane,
Jisne mohabbat ki ho,
Bichharne ke baad ki raatein,
Sirf wahi samajh sakta hai.
جدائی کا درد وہ جانے، جس نے محبت کی ہو
"Judaayi Ka Dard" एक दर्द भरी Sad Shayari है जो दिल की गहरी पीड़ा को खूबसूरत शब्दों में पिरोती है। हिंदी साहित्य में दर्द और जुदाई की शायरियाँ सबसे ज़्यादा दिल को छूती हैं, क्योंकि ये वो भावनाएँ हैं जो हर इंसान ने अपनी ज़िंदगी में किसी न किसी मोड़ पर महसूस की हैं।
यह शायरी उस एहसास को बयान करती है जब कोई अपना दूर हो जाता है और उसकी यादें दिल से जाती नहीं। मिर्ज़ा ग़ालिब, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, और मजरूह सुल्तानपुरी जैसे उर्दू-हिंदी के महान शायरों ने इसी दर्द को अपनी शायरी का आधार बनाया था। dailyshayari.in पर आपको ऐसी ही और दर्द भरी शायरियाँ मिलेंगी।
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रूह की बात जिस्म नहीं समझता,
दिल की बात ज़माना नहीं समझता,
यह दर्द मेरा अपना है,
इसे अब मैं ही समझता हूँ।
पुरानी मोहब्बत की यादें,
दिल के किसी कोने में बसी हैं,
मिटाना चाहता हूँ उन्हें,
मगर वो मिटती ही नहीं हैं।
कभी-कभी ख़ामोशी ही,
सब कुछ कह देती है,
जो बात लफ़्ज़ों में न हो,
आँखें वो पढ़ लेती हैं।