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آج کی شاعری — Featured Shayari
दर्द को शब्दों में कहाँ कह सकता हूँ,
चुप रहकर भी तो दुखता है दिल,
जो समझे वो साथ है मेरे,
जो न समझे वो भीड़ में शामिल।
तुमसे मिलना जैसे,
पहली बारिश का एहसास,
ना भूला जाए कभी,
ना बताया जाए किसी को।
तुम्हारी याद आती है रोज़ रात को,
आँखें बंद हों या खुली, बस तुम ही हो,
ये नींद भी अजीब है मेरी,
जागते हुए भी सपने दिखाती है।
ज़िंदगी के इस सफ़र में,
हर क़दम पर अकेला हूँ,
जो साथ चलते थे वो छोड़ गए,
अब साये से भी डरता हूँ।
सब कुछ भूल जाऊँ काश,
तेरी यादें भी भूल जाऊँ,
मगर दिल है कि मानता नहीं,
तुझे कैसे भूल जाऊँ।
दर्द को शब्दों में कहाँ कह सकता हूँ,
चुप रहकर भी तो दुखता है दिल,
जो समझे वो साथ है मेरे,
जो न समझे वो भीड़ में शामिल।
तेरी नीली आँखों में,
समंदर दिखता है मुझे,
उस गहराई में डूबना,
सबसे सुंदर लगता है मुझे।
तेरी आहट सुनकर,
दिल धड़कने लगता है,
जैसे बहार आती है,
हर कली खिलने लगती है।
आँखें मिलीं तो दिल खो गया,
बात हुई तो होश उड़ गया,
तुम्हें देखकर लगा जैसे,
ये दुनिया मेरी हो गई।
ज़िंदगी एक किताब है,
हर दिन एक नया सफ़ा,
जो कल का दर्द था,
आज उसी से मिली दुआ।
ख़ुद को कल से बेहतर बनाना,
यही असली कामयाबी है,
दूसरों से मुक़ाबला करने से,
बेहतर है ख़ुद से लड़ना।
तूफ़ान से डरना कैसा,
तूफ़ान हम खुद बनेंगे,
कोई रोक नहीं सकता,
जब हम ठान लेंगे।