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آج کی شاعری — Featured Shayari
तुम्हारी याद आती है रोज़ रात को,
आँखें बंद हों या खुली, बस तुम ही हो,
ये नींद भी अजीब है मेरी,
जागते हुए भी सपने दिखाती है।
तुमसे मिलना जैसे,
पहली बारिश का एहसास,
ना भूला जाए कभी,
ना बताया जाए किसी को।
दर्द को शब्दों में कहाँ कह सकता हूँ,
चुप रहकर भी तो दुखता है दिल,
जो समझे वो साथ है मेरे,
जो न समझे वो भीड़ में शामिल।
तुम्हारी याद आती है रोज़ रात को,
आँखें बंद हों या खुली, बस तुम ही हो,
ये नींद भी अजीब है मेरी,
जागते हुए भी सपने दिखाती है।
अनजाने दर्द को अब,
पहचानना सीख गया हूँ,
हर मुस्कुराहट के पीछे,
दर्द छुपाना सीख गया हूँ।
मोहब्बत में धोखा मिला,
यक़ीन का क़त्ल हुआ,
अब किसी पर भरोसा करना,
मुश्किल है बहुत।
तुम्हारे बिना अधूरा हूँ मैं,
जैसे बिन पानी नदी,
तुम्हारे साथ पूरा हूँ मैं,
जैसे मिले प्यार पहली बारी।
तेरी ख़ुशबू है कुछ ऐसी,
जो दिल में उतर जाती है,
जहाँ जाऊँ, जो देखूँ,
तेरी याद ही आती है।
तेरी आहट सुनकर,
दिल धड़कने लगता है,
जैसे बहार आती है,
हर कली खिलने लगती है।
हार के बाद जीत होती है,
रात के बाद दिन होता है,
जो हिम्मत नहीं हारते,
उनका हर सपना पूरा होता है।
ख़ुद पर भरोसा रखो,
ज़माना साथ देगा,
जो अपने दम पर चलते हैं,
उन्हें हर राह मिलती है।
मंज़िल पाने के लिए,
रात-दिन एक करने पड़ते हैं,
जो आराम में पड़े रहते हैं,
वो मंज़िल नहीं पाते।