रात के अँधेरे में,
दिल का दर्द बढ़ जाता है,
कोई साथ नहीं होता,
अकेलापन घेर लेता है।
Raat ke andhere mein,
Dil ka dard badh jaata hai,
Koi saath nahi hota,
Akelaapan gher leta hai.
رات کے اندھیرے میں، دل کا درد بڑھ جاتا ہے
सब कुछ भूल जाऊँ काश,
तेरी यादें भी भूल जाऊँ,
मगर दिल है कि मानता नहीं,
तुझे कैसे भूल जाऊँ।
दर्द को शब्दों में कहाँ कह सकता हूँ,
चुप रहकर भी तो दुखता है दिल,
जो समझे वो साथ है मेरे,
जो न समझे वो भीड़ में शामिल।
पुरानी मोहब्बत की यादें,
दिल के किसी कोने में बसी हैं,
मिटाना चाहता हूँ उन्हें,
मगर वो मिटती ही नहीं हैं।