रोता हूँ तो कोई नहीं देखता,
हँसता हूँ तो सब देख लेते हैं,
यही दुनिया का दस्तूर है,
ग़म छुपाओ, ख़ुशी बाँटो।
अब तो रोना भी नहीं आता,
आँखें पथरा गई हैं,
दर्द इतना पुराना है,
भावनाएं मर गई हैं।
वो बातें याद हैं अब भी,
जो कभी हम करते थे,
उन गलियों में जाने से डरता हूँ,
जहाँ हम कभी मिलते थे।
इंतज़ार करते रहे हम तेरा,
तू आया नहीं हम थक गए,
ज़िंदगी की राहों में भटककर,
ख़ुद से ही हम बिछड़ गए।