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آج کی شاعری — Featured Shayari
दर्द को शब्दों में कहाँ कह सकता हूँ,
चुप रहकर भी तो दुखता है दिल,
जो समझे वो साथ है मेरे,
जो न समझे वो भीड़ में शामिल।
तुमसे मिलना जैसे,
पहली बारिश का एहसास,
ना भूला जाए कभी,
ना बताया जाए किसी को।
तुम्हारी याद आती है रोज़ रात को,
आँखें बंद हों या खुली, बस तुम ही हो,
ये नींद भी अजीब है मेरी,
जागते हुए भी सपने दिखाती है।
दर्द को शब्दों में कहाँ कह सकता हूँ,
चुप रहकर भी तो दुखता है दिल,
जो समझे वो साथ है मेरे,
जो न समझे वो भीड़ में शामिल।
पुरानी मोहब्बत की यादें,
दिल के किसी कोने में बसी हैं,
मिटाना चाहता हूँ उन्हें,
मगर वो मिटती ही नहीं हैं।
कभी-कभी ख़ामोशी ही,
सब कुछ कह देती है,
जो बात लफ़्ज़ों में न हो,
आँखें वो पढ़ लेती हैं।
प्यार की इबादत में,
कोई भेद नहीं होता,
दिल जब सच्चा होता है,
रब भी मदद करता है।
तुझ में रब्ब दिखता है,
हर साँस में तू है,
जो माँगा था ज़िंदगी में,
सब कुछ तू ही है।
प्यार की कोई परिभाषा नहीं,
बस एहसास होता है,
जब तेरी एक झलक मिलती है,
दिल कहाँ थम जाता है।
रुक जाना नहीं तुझे,
राहें कठिन हों तो भी,
सपनों का पीछा करना,
मंज़िल मिलेगी तो भी।
लक्ष्य पर ध्यान रखो,
बाकी सब भूल जाओ,
जिसने ध्यान बिखेरा,
वो कभी नहीं पाया।
ख़ुद पर भरोसा रखो,
ज़माना साथ देगा,
जो अपने दम पर चलते हैं,
उन्हें हर राह मिलती है।