अनजाने दर्द को अब,
पहचानना सीख गया हूँ,
हर मुस्कुराहट के पीछे,
दर्द छुपाना सीख गया हूँ।
Anjaane dard ko ab,
Pehchaanna seekh gaya hoon,
Har muskurahat ke peeche,
Dard chhupaana seekh gaya hoon.
انجانے درد کو اب، پہچاننا سیکھ گیا ہوں
ग़म का साथी बन गई रात,
दिन तो बस गुज़रता है,
सुबह होने से डर लगता है,
फिर वही दर्द उभरता है।
इंतज़ार करते रहे हम तेरा,
तू आया नहीं हम थक गए,
ज़िंदगी की राहों में भटककर,
ख़ुद से ही हम बिछड़ गए।
तुझसे कुछ नहीं माँगता अब,
बस इतनी दुआ है,
जो दर्द तूने दिया है,
उसका दवा मिल जाए।