सर उठाकर जीता हूँ,
نگاه झुकाकर नहीं,
मेरा एटीट्यूड मेरी ताक़त,
यह जाता नहीं कहीं।
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सर उठाकर जीता हूँ,
نگاه झुकाकर नहीं,
मेरा एटीट्यूड मेरी ताक़त,
यह जाता नहीं कहीं।
जो टूटा नहीं बुरे वक़्त में,
वही असली बहादुर है,
मुश्किलें मुझे मज़बूत बनाती,
यही है मेरा जज़्बा।
यह मेरा स्टाइल है,
नक़ल नहीं करता किसी की,
खुद की राह बनाता हूँ,
यही है पहचान मेरी।
ज़िंदगी मेरी शर्तों पर,
मौत भी मेरी शर्त पर,
किसी के आगे नहीं झुकूँगा,
चाहे हो कोई भी मर्तबा।
मुझ में कोई कमी नहीं,
मैं पूरा हूँ अपने आप,
दुनिया चाहे कुछ भी कहे,
मैं हूँ अपनी राह का राज।
आँखों में आग है मेरी,
दिल में तूफ़ान है,
जो रोकने की कोशिश करे,
वो समझे मेरा मिज़ाज।
मेरी पहचान खुद बनाई है,
किसी ने नहीं बनाई,
हर मुश्किल को पार करके,
यह पहचान पाई है।
दुश्मनों को जवाब देता हूँ,
कर्मों से, शब्दों से नहीं,
मेरी कामयाबी ही काफ़ी है,
झूठी बातों से नहीं।
बोलता नहीं, बस चलता हूँ,
एटीट्यूड खुद बोलता है,
मेरी ख़ामोशी में जो दम है,
वो हर शोर को डुबोता है।