जो हार नहीं मानते तूफ़ानों में,
वही परिंदे आसमान छूते हैं,
रात कितनी भी काली हो,
सुबह का सूरज ज़रूर उगता है।
नई राह बनाना ही असली हुनर है,
जो दूसरों की राह पर चले,
वो मंज़िल नहीं पाते,
जो खुद का रास्ता बनाए।
तूफ़ान से डरना कैसा,
तूफ़ान हम खुद बनेंगे,
कोई रोक नहीं सकता,
जब हम ठान लेंगे।
टूटकर भी जो गिरे नहीं रास्ते में,
वही इंसान मंज़िल पाता है,
पत्थर से भी रास्ता बनाना,
यही ज़िंदगी सिखाती है।