दर्द को शब्दों में कहाँ कह सकता हूँ,
चुप रहकर भी तो दुखता है दिल,
जो समझे वो साथ है मेरे,
जो न समझे वो भीड़ में शामिल।
Dard ko shabdon mein kahan keh sakta hoon,
Chup rehkar bhi to dukhta hai dil,
Jo samjhe wo saath hai mere,
Jo na samjhe wo bheed mein shaamil.
درد کو الفاظ میں کہاں کہہ سکتا ہوں
बिछड़ गए हम तो बिछड़ गए,
मगर दिल अब भी तड़पता है,
तेरे बिना यह जहाँ अधूरा,
हर पल, हर घड़ी खटकता है।
अब तो रोना भी नहीं आता,
आँखें पथरा गई हैं,
दर्द इतना पुराना है,
भावनाएं मर गई हैं।
आँसू बहाना भी एक कला है,
हर वक़्त नहीं रोया जाता,
कभी-कभी मुस्कुराकर,
दिल का दर्द भी छुपाया जाता है।