इंसान की फ़ितरत है,
हमेशा कुछ और चाहना,
जो मिला उसकी क़दर नहीं,
जो नहीं वो पाना।
Insaan ki fitrat hai,
Hamesha kuch aur chaahna,
Jo mila uski qadar nahi,
Jo nahi woh paana.
انسان کی فطرت ہے، ہمیشہ کچھ اور چاہنا
ज़िंदगी हर मोड़ पर,
कुछ न कुछ सिखाती है,
जो सीखे वो बढ़ता है,
जो न सीखे वो रुकता है।
कल की चिंता में आज को,
बर्बाद मत करो,
आज जो मिला है उसे,
जी भर के जी लो।
वक़्त की क़ीमत जानो,
यह लौटकर नहीं आता,
जो वक़्त गँवाए,
वो ज़िंदगी से हारता है।