तन्हा हूँ, मगर ख़ुश हूँ,
ख़ुद की संगत काफ़ी है।
सभी शायरियाँ — हिंदी, हिंग्लिश, उर्दू
تمام شاعری — Hindi, Hinglish, Urdu
Page 3 · 19–27 of 304
तन्हा हूँ, मगर ख़ुश हूँ,
ख़ुद की संगत काफ़ी है।
दिल एक किताब है,
हर ज़ख्म एक फ़साना।
रात का मुसाफ़िर हूँ,
सितारों से बातें करता हूँ।
वक़्त का फ़क़ीर हूँ,
पल-पल जीता हूँ।
मोहब्बत करता हूँ,
ख़ुद से भी, दुनिया से भी।
दर्द को शब्दों में लिखा,
शायर बन गया।
झुकना नहीं सीखा,
टूटना नहीं सीखा।
ज़िंदगी मेरी शायरी है,
हर पल एक नया शेर।
इश्क़ में डूबा हूँ,
पर होश नहीं खोया।