ख़ुद से बातें करना सीख गया हूँ,
तनहाई में जीना सीख गया हूँ,
जब से तू गया है ज़िंदगी से,
दर्द को मुस्कुराहट में छुपाना सीख गया हूँ।
Khud se baatein karna seekh gaya hoon,
Tanhaai mein jeena seekh gaya hoon,
Jab se tu gaya hai zindagi se,
Dard ko muskurahat mein chhupaana seekh gaya hoon.
خود سے باتیں کرنا سیکھ گیا ہوں
ज़िंदगी का यह सफ़र,
कभी-कभी बहुत थका देता है,
जब कोई साथ नहीं होता,
तब रास्ता और लंबा लगता है।
आँसू बहाना भी एक कला है,
हर वक़्त नहीं रोया जाता,
कभी-कभी मुस्कुराकर,
दिल का दर्द भी छुपाया जाता है।
दर्द को शब्दों में कहाँ कह सकता हूँ,
चुप रहकर भी तो दुखता है दिल,
जो समझे वो साथ है मेरे,
जो न समझे वो भीड़ में शामिल।