तेरी ख़ुशबू अब भी आती है,
उन यादों की पगडंडी पर,
जहाँ हम साथ चलते थे,
वहाँ अब सिर्फ़ मैं हूँ।
Teri khushbu ab bhi aati hai,
Un yaadon ki pagdandi par,
Jahaan hum saath chalte the,
Wahaan ab sirf main hoon.
تیری خوشبو اب بھی آتی ہے، ان یادوں کی پگڈنڈی پر
रोता हूँ तो कोई नहीं देखता,
हँसता हूँ तो सब देख लेते हैं,
यही दुनिया का दस्तूर है,
ग़म छुपाओ, ख़ुशी बाँटो।
चुपके से आता है ये दर्द,
चुपके से दिल को रुलाता है,
कोई नहीं होता पास में,
तब ये और तड़पाता है।
बिछड़ गए हम तो बिछड़ गए,
मगर दिल अब भी तड़पता है,
तेरे बिना यह जहाँ अधूरा,
हर पल, हर घड़ी खटकता है।