शाम होती है तो उदास हो जाता हूँ,
रात आती है तो बेचैन रहता हूँ,
दिन तो बस यूँही गुज़र जाता है,
तेरी याद में दीवाना रहता हूँ।
Sham hoti hai to udaas ho jaata hoon,
Raat aati hai to bechain rehta hoon,
Din to bas yunhi guzar jaata hai,
Teri yaad mein deewana rehta hoon.
شام ہوتی ہے تو اداس ہو جاتا ہوں
बारिश आई तो याद आए वो,
धुंध छाई तो याद आए वो,
हर मौसम में, हर लम्हे में,
बस तुम्हारी ही याद आती है।
ख़ुद से बातें करना सीख गया हूँ,
तनहाई में जीना सीख गया हूँ,
जब से तू गया है ज़िंदगी से,
दर्द को मुस्कुराहट में छुपाना सीख गया हूँ।
ग़म का साथी बन गई रात,
दिन तो बस गुज़रता है,
सुबह होने से डर लगता है,
फिर वही दर्द उभरता है।