ग़म का साथी बन गई रात,
दिन तो बस गुज़रता है,
सुबह होने से डर लगता है,
फिर वही दर्द उभरता है।
Gham ka saathi ban gayi raat,
Din to bas guzarta hai,
Subah hone se dar lagta hai,
Phir wahi dard ubharta hai.
غم کا ساتھی بن گئی رات، دن تو بس گزرتا ہے
"Gham Ka Saathi" एक दर्द भरी Sad Shayari है जो दिल की गहरी पीड़ा को खूबसूरत शब्दों में पिरोती है। हिंदी साहित्य में दर्द और जुदाई की शायरियाँ सबसे ज़्यादा दिल को छूती हैं, क्योंकि ये वो भावनाएँ हैं जो हर इंसान ने अपनी ज़िंदगी में किसी न किसी मोड़ पर महसूस की हैं।
यह शायरी उस एहसास को बयान करती है जब कोई अपना दूर हो जाता है और उसकी यादें दिल से जाती नहीं। मिर्ज़ा ग़ालिब, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, और मजरूह सुल्तानपुरी जैसे उर्दू-हिंदी के महान शायरों ने इसी दर्द को अपनी शायरी का आधार बनाया था। dailyshayari.in पर आपको ऐसी ही और दर्द भरी शायरियाँ मिलेंगी।
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रात के अँधेरे में,
दिल का दर्द बढ़ जाता है,
कोई साथ नहीं होता,
अकेलापन घेर लेता है।
रोता हूँ तो कोई नहीं देखता,
हँसता हूँ तो सब देख लेते हैं,
यही दुनिया का दस्तूर है,
ग़म छुपाओ, ख़ुशी बाँटो।
टूटे दिल को जोड़ने की,
कोशिश की बहुत बार मैंने,
मगर हर बार टूट जाता है,
यही मेरी क़िस्मत है शायद।