जो हार नहीं मानते तूफ़ानों में,
वही परिंदे आसमान छूते हैं,
रात कितनी भी काली हो,
सुबह का सूरज ज़रूर उगता है।
टूटकर भी जो गिरे नहीं रास्ते में,
वही इंसान मंज़िल पाता है,
पत्थर से भी रास्ता बनाना,
यही ज़िंदगी सिखाती है।
ज़िंदगी एक किताब है,
हर दिन एक नया सफ़ा,
जो कल का दर्द था,
आज उसी से मिली दुआ।
अपना रास्ता ख़ुद बनाओ,
दूसरों के नक्शे-क़दम पर मत चलो,
तुम्हारी मंज़िल तुम्हारी है,
उसे ख़ुद पाओ।