कभी-कभी ख़ामोशी ही,
सब कुछ कह देती है,
जो बात लफ़्ज़ों में न हो,
आँखें वो पढ़ लेती हैं।
Kabhi kabhi khamoshi hi,
Sab kuch keh deti hai,
Jo baat lafzon mein na ho,
Aankhen woh padh leti hain.
کبھی کبھی خاموشی ہی، سب کچھ کہہ دیتی ہے
चुपके से आता है ये दर्द,
चुपके से दिल को रुलाता है,
कोई नहीं होता पास में,
तब ये और तड़पाता है।
रोता हूँ तो कोई नहीं देखता,
हँसता हूँ तो सब देख लेते हैं,
यही दुनिया का दस्तूर है,
ग़म छुपाओ, ख़ुशी बाँटो।
आँखों में समंदर है मेरा,
मगर कोई नहीं देखता,
हर आँसू एक कहानी है,
मगर कोई नहीं सुनता।