सब कुछ भूल जाऊँ काश,
तेरी यादें भी भूल जाऊँ,
मगर दिल है कि मानता नहीं,
तुझे कैसे भूल जाऊँ।
Sab kuch bhool jaoon kaash,
Teri yaadein bhi bhool jaoon,
Magar dil hai ki maanta nahi,
Tujhe kaise bhool jaoon.
سب کچھ بھول جاؤں کاش، تیری یادیں بھی بھول جاؤں
रोता हूँ तो कोई नहीं देखता,
हँसता हूँ तो सब देख लेते हैं,
यही दुनिया का दस्तूर है,
ग़म छुपाओ, ख़ुशी बाँटो।
कभी-कभी ख़ामोशी ही,
सब कुछ कह देती है,
जो बात लफ़्ज़ों में न हो,
आँखें वो पढ़ लेती हैं।
इंतज़ार करते रहे हम तेरा,
तू आया नहीं हम थक गए,
ज़िंदगी की राहों में भटककर,
ख़ुद से ही हम बिछड़ गए।