Subhash Ki Pukaar
सुभाष की पुकार है,
तुम मुझे ख़ून दो,
मैं आज़ादी दूँगा,
यह वादा मेरा है।
Subhash ki pukaar hai,
Tum mujhe khoon do,
Main aazaadi doonga,
Yeh waada mera hai.
سبھاش کی پکار ہے، تم مجھے خون دو
This echoes Netaji Subhas Chandra Bose's famous call, "Give me blood, and I will give you freedom," presented as his promise to the nation.
मिट्टी की ख़ुशबू में,
माँ का प्यार है,
इस ज़मीन पर मरना भी,
मेरा अधिकार है।
आज़ादी का मतलब,
सिर्फ़ झंडा फहराना नहीं,
उन शहीदों को याद करना,
जो आए और गए वापस नहीं।
सरहद पर जो खड़ा है,
वो नहीं सोचता ठंड-गर्मी,
माँ की गोद से दूर है,
पर दिल में है दर्मी।
इंक़लाब की आग,
आज भी जलती है,
भगत सिंह की कहानी,
हर दिल में पलती है।
तिरंगा जब लहराता है,
दिल में जोश आता है,
यह रंग नहीं, जज़्बा है,
जो रगों में उबलता है।
जब-जब भारत पुकारे,
हम चल दिए,
सर पर कफ़न बाँधकर,
मैदान में निकल पड़े।