वो चले गए और छोड़ गए,
यादों का एक सिलसिला,
अब हर मोड़ पर मिलते हैं,
उनके जाने के निशां।
आँखों की नमी छुपाता हूँ,
सबके सामने मुस्कुराता हूँ,
मगर अकेले में जब रोता हूँ,
तब अपना असली चेहरा पाता हूँ।
बारिश आई तो याद आए वो,
धुंध छाई तो याद आए वो,
हर मौसम में, हर लम्हे में,
बस तुम्हारी ही याद आती है।
तन्हा रातों में जब नींद नहीं आती,
तेरी यादें आकर सता जाती हैं,
मन की बात किसे कहूँ,
खुद से भी तो शर्म आती है।