अब तो रोना भी नहीं आता,
आँखें पथरा गई हैं,
दर्द इतना पुराना है,
भावनाएं मर गई हैं।
Ab to rona bhi nahi aata,
Aankhen pathra gayi hain,
Dard itna purana hai,
Bhavnaayein mar gayi hain.
اب تو رونا بھی نہیں آتا، آنکھیں پتھرا گئی ہیں
पुरानी मोहब्बत की यादें,
दिल के किसी कोने में बसी हैं,
मिटाना चाहता हूँ उन्हें,
मगर वो मिटती ही नहीं हैं।
टूटे दिल को जोड़ने की,
कोशिश की बहुत बार मैंने,
मगर हर बार टूट जाता है,
यही मेरी क़िस्मत है शायद।
दर्द को शब्दों में कहाँ कह सकता हूँ,
चुप रहकर भी तो दुखता है दिल,
जो समझे वो साथ है मेरे,
जो न समझे वो भीड़ में शामिल।