दर्द को शब्दों में कहाँ कह सकता हूँ,
चुप रहकर भी तो दुखता है दिल,
जो समझे वो साथ है मेरे,
जो न समझे वो भीड़ में शामिल।
वो चले गए और छोड़ गए,
यादों का एक सिलसिला,
अब हर मोड़ पर मिलते हैं,
उनके जाने के निशां।
रात के अँधेरे में,
दिल का दर्द बढ़ जाता है,
कोई साथ नहीं होता,
अकेलापन घेर लेता है।
ज़िंदगी का यह सफ़र,
कभी-कभी बहुत थका देता है,
जब कोई साथ नहीं होता,
तब रास्ता और लंबा लगता है।