Sarhad Pe Sipahi
सरहद पर जो खड़ा है,
वो नहीं सोचता ठंड-गर्मी,
माँ की गोद से दूर है,
पर दिल में है दर्मी।
Sarhad par jo khada hai,
Woh nahi sochta thhand-garmi,
Maa ki god se door hai,
Par dil mein hai darmi.
سرحد پر جو کھڑا ہے، وہ نہیں سوچتا ٹھنڈ گرمی
The soldier at the border does not think about cold or heat; he is far from his mother's lap, yet full of feeling for his country.
सुभाष की पुकार है,
तुम मुझे ख़ून दो,
मैं आज़ादी दूँगा,
यह वादा मेरा है।
हर घर तिरंगा लगाओ,
हर दिल में जज़्बा जगाओ,
भारत की शान बढ़ाओ,
गर्व से जीना सिखाओ।
फ़ौज का जवान है,
सबसे बड़ा इंसान है,
जान देता है देश के लिए,
यही उसकी पहचान है।
अपना भारत महान है,
इसकी संस्कृति पुरानी है,
हज़ारों सालों की विरासत,
यही हमारी कहानी है।
वतन की हवा जब छूती है,
रगों में लहू दौड़ता है,
इस देश के लिए जीना,
यही सच्चा प्यार होता है।
आज़ादी की क़ीमत,
ख़ून से चुकाई गई,
हर शहीद की क़ुर्बानी से,
यह धरती सजाई गई।