सरहद पर जो खड़ा है,
वो नहीं सोचता ठंड-गर्मी,
माँ की गोद से दूर है,
पर दिल में है दर्मी।
Sarhad par jo khada hai,
Woh nahi sochta thhand-garmi,
Maa ki god se door hai,
Par dil mein hai darmi.
سرحد پر جو کھڑا ہے، وہ نہیں سوچتا ٹھنڈ گرمی
यह तिरंगा मेरी शان है,
इस पर सब कुछ क़ुर्बान है,
जब तक साँस है तन में,
भारत मेरी जान है।
सुभाष की पुकार है,
तुम मुझे ख़ून दो,
मैं आज़ादी दूँगा,
यह वादा मेरा है।
जब-जब भारत पुकारे,
हम चल दिए,
सर पर कफ़न बाँधकर,
मैदान में निकल पड़े।