तूफ़ान में भी जो चले,
वो मंज़िल पाता है,
कमज़ोर लोग बैठ जाते,
मेरा जज़्बा जागता है।
Toofaan mein bhi jo chale,
Woh manzil paata hai,
Kamzor log baith jaate,
Mera jazba jaagta hai.
طوفان میں بھی جو چلے، وہ منزل پاتا ہے
सर नहीं झुकता मेरा,
मुश्किलों के आगे,
पैर जमाकर खड़ा हूँ,
किसी के पीछे नहीं भागे।
मैं किसी का गुलाम नहीं,
खुद का राजा हूँ मैं,
जो चाहे कहे दुनिया,
मेरी राह पर चलता हूँ मैं।
चुप हूँ तो यह कमज़ोरी नहीं,
यह मेरी ताक़त है,
जब बोलूँ तो दुनिया सुने,
यह मेरी आदत है।