एक तेरी चाहत,
सब कुछ काफ़ी है,
बाकी दुनिया न मिले,
तू ही मेरी ख़ुशी है।
Ek teri chaahat,
Sab kuch kaafi hai,
Baaki duniya na mile,
Tu hi meri khushi hai.
ایک تیری چاہت، سب کچھ کافی ہے
सुबह की नींद में,
तेरे ही ख़्वाब हैं,
रात की आखों में,
तेरी ही तस्वीर है।
मोहब्बत में आग है,
जो जलाती भी है,
पर इसी आग में,
दो रूहें मिलती हैं।
تیری آنکھوں کا نشہ,
کچھ اور ہی ہے،
اس میں ڈوبنا چاہتا ہوں،
یہ میری چاہت ہے۔