Inquilab
इंक़लाब की आग,
आज भी जलती है,
भगत सिंह की कहानी,
हर दिल में पलती है।
Inqilaab ki aag,
Aaj bhi jalti hai,
Bhagat Singh ki kahaani,
Har dil mein palti hai.
انقلاب کی آگ، آج بھی جلتی ہے
The fire of "Inquilab" still burns today, and Bhagat Singh's story lives on in every heart. A tribute to the revolutionary.
सुभाष की पुकार है,
तुम मुझे ख़ून दो,
मैं आज़ादी दूँगा,
यह वादा मेरा है।
हर घर तिरंगा लगाओ,
हर दिल में जज़्बा जगाओ,
भारत की शान बढ़ाओ,
गर्व से जीना सिखाओ।
फ़ौज का जवान है,
सबसे बड़ा इंसान है,
जान देता है देश के लिए,
यही उसकी पहचान है।
अपना भारत महान है,
इसकी संस्कृति पुरानी है,
हज़ारों सालों की विरासत,
यही हमारी कहानी है।
वतन की हवा जब छूती है,
रगों में लहू दौड़ता है,
इस देश के लिए जीना,
यही सच्चा प्यार होता है।
आज़ादी की क़ीमत,
ख़ून से चुकाई गई,
हर शहीद की क़ुर्बानी से,
यह धरती सजाई गई।