इंक़लाब की आग,
आज भी जलती है,
भगत सिंह की कहानी,
हर दिल में पलती है।
Inqilaab ki aag,
Aaj bhi jalti hai,
Bhagat Singh ki kahaani,
Har dil mein palti hai.
انقلاب کی آگ، آج بھی جلتی ہے
देश की मिट्टी से बना हूँ,
इसी मिट्टी में मिलूँगा,
भारत माँ का क़र्ज़ अदा करने,
हर मुश्किल से लड़ूँगा।
हिंदुस्तान मेरा घर है,
इसकी मिट्टी से लगाव है,
चाहे दुनिया कहीं भी हो,
दिल में यही लगाव है।
देश के लिए जो लड़े,
वो असली शेर है,
देश प्रेम में जो मरे,
उसे सलाम करता हूँ।