तिरंगा जब लहराता है,
दिल में जोश आता है,
यह रंग नहीं, जज़्बा है,
जो रगों में उबलता है।
Tiranga jab lehraata hai,
Dil mein josh aata hai,
Yeh rang nahi, jazba hai,
Jo ragon mein ubalta hai.
ترنگا جب لہراتا ہے، دل میں جوش آتا ہے
"Tiranga Lehra" एक जोशीली Desh Bhakti Shayari है जो भारत माँ के प्रति प्यार और समर्पण को शब्दों में उतारती है। स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और अन्य राष्ट्रीय पर्वों पर ऐसी शायरियाँ दिल में देशभक्ति का जज़्बा जगाती हैं।
रामधारी सिंह दिनकर, सुभद्रा कुमारी चौहान और हरिवंशराय बच्चन ने अपनी कविताओं से भारत के स्वतंत्रता संग्राम में आग भरी थी। यह Desh Bhakti Shayari उसी परंपरा को आगे बढ़ाती है। dailyshayari.in पर ऐसी और भी देशभक्ति शायरी मिलेगी।
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सरहदें लाँघ नहीं सकतीं,
हमारे इरादों को,
ديश की आन-बान के लिए,
मिटा दो सब वादों को।
सरहद पर जो खड़ा है,
वो नहीं सोचता ठंड-गर्मी,
माँ की गोद से दूर है,
पर दिल में है दर्मी।
देश के लिए जो लड़े,
वो असली शेर है,
देश प्रेम में जो मरे,
उसे सलाम करता हूँ।